रंगोत्सव, प्रेम, एकता और आध्यात्मिक आनंद का दिव्य उत्सव*
रंगोत्सव, प्रेम, एकता और आध्यात्मिक आनंद का दिव्य उत्सव*
*💫परमार्थ निकेतन से रंगों के पावन उत्सव होली की हार्दिक मंगलकामनाएँ*
*✨रंगोत्सव, प्रेम, एकता और आध्यात्मिक आनंद का दिव्य उत्सव*
*🌟होली का दिव्य उल्लास प्रत्येक हृदय में सदा बना रहे और जीवन प्रेम, प्रकाश और प्रगति के रंगों से निरंतर खिलता रहे*
*✨हम एक-दूसरे के जीवन में रंग भरें, किसी के जीवन से रंग न छीनें*
*✨जीवन का सबसे सुंदर रंग ‘मानवता’*
*🙏🏻स्वामी चिदानन्द सरस्वती*
ऋषिकेश, 4 मार्च। परमार्थ निकेतन, माँ गंगा के पावन तट पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में दिव्य, आध्यात्मिक और उत्सवमयी ऊर्जा के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर रंगों का भव्य उत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।
देश-विदेश से आए श्रद्धालु, योग जिज्ञासु और साधक इस पावन अवसर पर एकत्र होकर आपसी भेदभाव, जाति, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर एक वैश्विक परिवार के रूप में प्रेम के रंगों में सराबोर हो गये।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आज देशवासियों को रंगोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुये कहा कि सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के रंगों की मधुर बौछार हो। जीवन का प्रत्येक क्षण आनंद, शांति और सकारात्मकता से परिपूर्ण रहे। घर-परिवार में प्रेम, स्वास्थ्य और सौहार्द सदा बना रहे। हर चुनौती अवसर में बदले, हर प्रयास सफलता में खिले और हर दिन नई आशा व ऊर्जा लेकर आए तथा जीवन निरंतर प्रगति, प्रकाश और प्रसन्नता के सुंदर रंगों से आलोकित होता रहे।
स्वामी जी ने कहा कि होली का संदेश है कि हम एक-दूसरे के जीवन में रंग भरें, किसी के जीवन से रंग न छीनें। जीवन का सबसे सुंदर रंग ‘मानवता’ है, जो हर भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को जोड़ता है। जब हम सेवा, सहयोग और सद्भाव को अपनाते हैं, तभी हमारा जीवन वास्तव में रंगीन बनता है और समाज में शांति, सौहार्द और आनंद का वातावरण स्थापित होता है।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने इस अवसर पर कहा कि होली प्रेम और करुणा का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने परिवार, समाज और प्रकृति के साथ गहरा संबंध स्थापित करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल रंगों का उपयोग करें, जल संरक्षण का ध्यान रखें और होली को स्वच्छता, सेवा और सद्भाव के साथ मनाएँ। आपस में मर्यादा के साथ होली खेलें।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है, होली का उत्साह केवल एक दिन तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे जीवन का स्थायी भाव बने। हम प्रतिदिन अपने व्यवहार में प्रेम, सहयोग, क्षमा और करुणा के रंग भरें। अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए सकारात्मक सोच और सेवा की भावना को अपनाएँ। यही वास्तविक होली है और यही उत्सव है।
परमार्थ निकेतन में रंगोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिकता के साथ मनाया गया। रंगों का यह महापर्व मानवता, प्रेम, सद्भाव और आत्मिक जागरण का संदेश देने वाला अवसर है। रंगोत्सव का यह पावन पर्व सभी के लिए आनंद, उत्साह और नवचेतना लेकर आये। यह दिव्य उल्लास प्रत्येक हृदय में सदा बना रहे और जीवन प्रेम, प्रकाश और प्रगति के रंगों से निरंतर खिलता रहे।
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