जर्मनी पहुँचे देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या सनातन मूल्यों और आधुनिक जीवन का समन्वय बना बर्लिन का दीप महायज्ञ
जर्मनी पहुँचे देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या सनातन मूल्यों और आधुनिक जीवन का समन्वय बना बर्लिन का दीप महायज्ञ
जर्मनी पहुँचे देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या
सनातन मूल्यों और आधुनिक जीवन का समन्वय बना बर्लिन का दीप महायज्ञ
हरिद्वार 31 जनवरी।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति युवा आइकन आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी अपने अंतरराष्ट्रीय प्रवास के अंतर्गत जर्मनी की राजधानी बर्लिन पहुँचे। उनके नेतृत्व में युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि विकसित करने के उद्देश्य से गायत्री दीप महायज्ञ का आयोजन संपन्न हुआ।
इस यज्ञीय आयोजन में भारतीय एवं जर्मन युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक समरसता का सशक्त उदाहरण बना दिया। उल्लेखनीय है कि वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शताब्दी समारोह के उपरांत यह डॉ. चिन्मय पंड्या जी की प्रथम विदेश यात्रा है, जिसमें वे युवाओं को केंद्र में रखकर विभिन्न प्रेरक एवं रचनात्मक आयोजनों का नेतृत्व कर रहे हैं।
बर्लिन में आयोजित गायत्री दीप महायज्ञ में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने युगऋषि पूज्य पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चरित्र निर्माण, आत्म-परिष्कार एवं मानव-सेवा आज के वैश्विक परिदृश्य में सर्वाधिक प्रासंगिक मूल्य हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आध्यात्मिक चेतना को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाते हुए नैतिकता, अनुशासन एवं सेवा-भाव को अपने आचरण में उतारें। गायत्री उपासना के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि नित्य उपासना, साधना एवं आराधना व्यक्ति को संतुलित, उद्देश्यपूर्ण तथा आंतरिक रूप से सशक्त बनाती है।
दीप महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार एवं सामूहिक साधना का वातावरण उपस्थित जनसमूह के लिए गहन आध्यात्मिक अनुभूति का कारण बना। सहभागियों ने इस आयोजन को आस्था के पुनर्जागरण, सकारात्मक जीवन-दृष्टि के विकास एवं आत्म-परिष्कार के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा के रूप में अनुभव किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर युवाओं ने भारतीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा के प्रति गहरी रुचि व्यक्त करते हुए ऐसे आयोजनों को वैश्विक शांति, सांस्कृतिक संवाद एवं युवा सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। तो वहीं युवाओं ने इसे भारत की सनातन सांस्कृतिक विरासत के वैश्विक प्रसार तथा युवा चेतना के सकारात्मक रूपांतरण के रूप में सशक्त माध्यम कहा। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय एवं जर्मनी मूल के युवा उपस्थित रहे।
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