आचार्य महामंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान स्वामी महादेवानन्द सरस्वती महाराज की जयंती बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई।
आचार्य महामंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान स्वामी महादेवानन्द सरस्वती महाराज की जयंती बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई।
आचार्य महामंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान स्वामी महादेवानन्द सरस्वती महाराज की जयंती बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई।
हरिद्वार के प्रसिद्ध श्री भोलानन्द सन्यास आश्रम मे प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री श्री महादेवानन्द सरस्वती महाराज की पतित पावन जयंती आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय श्री श्री तेजसानन्द महाराज के पतित पावन सानिध्य में धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनायी गई इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महामंडलेश्वर 1008 श्री तेजसानन्द महाराज ने कहाइस पृथ्वी लोक पर सतगुरु से बड़ा और सच्चा पथप्रदर्शक कोई नहीं होता। सतगुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार में भटकते हुए जीव को ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। जब मनुष्य संसार के मोह, माया, दुःख और भ्रम में उलझ जाता है, तब सतगुरु ही उसे सत्य का मार्ग दिखाते हैं और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी तेजसानन्द महाराज ने कहा सतगुरु केवल एक साधारण गुरु नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर के साक्षात प्रतिनिधि के रूप में इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं, जिनका उद्देश्य मानव जाति का कल्याण और उद्धार करना होता है।सतगुरु तारणहार होते हैं, वे अपने शिष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कराने की शक्ति रखते हैं। वे ही जीवन रूपी नाव के सच्चे नाविक हैं, जो अपने शिष्य को इस संसार रूपी भँवर से निकालकर मोक्ष के तट तक पहुँचाते हैं। इस अवसर पर श्री भोलानंद सन्यास आश्रम के सचिव श्री राजगिरी महाराज ने कहा सतगुरु ही हमारे राम हैं, सतगुरु ही हमारे सच्चे मार्गदर्शक हैं और सतगुरु ही हमारे जीवन के आधार हैं। उनकी महिमा अपरंपार है, जिसका वर्णन शब्दों में पूर्ण रूप से करना संभव नहीं है। उनकी कृपा से ही मनुष्य के जीवन में शांति, संतोष और सच्चे सुख का आगमन होता है इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी विश्वरूपा नन्द महाराज ने कहासतगुरु का ज्ञान मनुष्य के जीवन को नई दिशा देता है। वे हमें सत्य, धर्म, प्रेम, करुणा और सेवा का मार्ग सिखाते हैं। उनके उपदेशों से मनुष्य के अंदर की बुराइयाँ समाप्त होने लगती हैं और उसके भीतर अच्छे संस्कारों का विकास होता है। सतगुरु के चरणों में बैठकर मनुष्य अपने जीवन के वास्तविक स्वरूप को पहचानता है और अपने आत्मा तथा परमात्मा के संबंध को समझता है। सतगुरु का सान्निध्य मनुष्य के जीवन को पवित्र और सफल बना देता है।सतगुरु की कृपा से ही मनुष्य इस संसार के दुखों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है। वे हमें सिखाते हैं कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि ईश्वर की भक्ति और सत्कर्मों में निहित है। सतगुरु का मार्गदर्शन मनुष्य के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर और मृत्यु से अमरता की ओर ले जाता है। वे हमारे जीवन के सच्चे हितैषी होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के केवल हमारे कल्याण के लिए कार्य करते हैं।इस प्रकार सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर ईश्वर के साक्षात स्वरूप और उनके प्रतिनिधि के रूप में अवतरित होते हैं। उनका मार्गदर्शन मनुष्य के जीवन को सफल, सार्थक और पवित्र बना देता है। जो मनुष्य सतगुरु की शरण में जाता है और उनके बताए मार्ग पर चलता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है और वह अंततः भवसागर को पार कर परम शांति और मोक्ष को प्राप्त करता है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य का परम सौभाग्य है कि उसे सतगुरु का सान्निध्य प्राप्त हो, क्योंकि सतगुरु ही जीवन के सच्चे उद्धारक और परम पथप्रदर्शक हैं। इस अवसर पर हरिद्वार के अनेको आश्रमों से आये संत महापुरुषों ने भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया
पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय श्री श्री तेजसानन्द महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए स्वामी श्री रवि गिरी जी महाराज जो की ऋषिकेश से हैं।
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