सीईए अध्यक्ष ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए पंपित भंडारण जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीईए अध्यक्ष ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए पंपित भंडारण जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की की पम्प्ड स्टोरेज जलविद्युत पर रिपोर्ट जारी की
• सीईए अध्यक्ष ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए पंपित भंडारण जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
• रिपोर्ट में पंपित भंडारण जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना को तेज करने के लिए नीतिगत मार्ग, बाज़ार विस्तार और तकनीकी उन्नति का उल्लेख किया गया है।
दिल्ली, भारत | 12 मार्च, 2026 – केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद ने आज भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर (PSP) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। अध्यक्ष सीईए में पीएसपी पर विशेषज्ञों की सभा को संबोधित कर रहे थे, जहां IIT रुड़की द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट “भारत में पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर: ड्राइव, पहलें, बाज़ार वृद्धि और चुनौतियाँ” का विमोचन किया गया।
श्री प्रसाद ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा के अभूतपूर्व विस्तार का साक्षी बन रहा है, जिसे केवल बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण, विशेषकर दीर्घ अवधि ऊर्जा भंडारण की तैनाती के माध्यम से ही स्थायी बनाया जा सकता है। पीएसपी की दीर्घ अवधि ऊर्जा भंडारण क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि यह भारत में दीर्घ अवधि ऊर्जा भंडारण की एक सिद्ध तकनीक है, जिसमें उच्च स्तर का स्वदेशीकरण है और जो पीक घंटों के लिए प्रतिस्पर्धी लागत पर उपलब्ध है। उन्होंने आगे बताया कि भारत ने अगले 10 वर्षों में 100 गीगावाट पीएसपी जोड़ने की योजना बनाई है और इसके साथ ही पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास में विश्व में दूसरा स्थान प्राप्त करेगा। इसके अनुरूप, भारत सरकार ने देश में पीएसपी के विकास को तेज करने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं।
उन्होंने IIT रुड़की की उस टीम को बधाई दी, जिसका नेतृत्व जलविद्युत और पीएसपी के वैश्विक विशेषज्ञ प्रो. अरुण कुमार ने किया है, जिन्होंने एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट भारत और वैश्विक स्तर पर पीएसपी के विकास की स्थिति की समीक्षा करती है, जिसमें प्रौद्योगिकी, नीतियां और विनियम, तथा पीएसपी के व्यावसायिक मॉडल शामिल हैं और देश में पीएसपी के विकास को तेज करने के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
इस अवसर पर बोलते हुए IIT रुड़की के प्रो. अरुण कुमार ने रिपोर्ट का विमोचन करने के लिए सहर्ष सहमति देने तथा इसके अवलोकन में सहयोग प्रदान करने के लिए सीईए के अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया। प्रो. कुमार ने इस बात पर बल दिया कि भारत को अपने विद्युत ग्रिड के डीकार्बोनाइजेशन के लिए पीएसपी के विकास को और तेज करना चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत को पीएसपी प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना चाहिए।
इस कार्यक्रम में सीईए के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (CPSU), पीएसपी डेवलपर्स, प्रमुख परामर्श कंपनियां, वित्तीय संस्थान तथा प्रौद्योगिकी प्रदाता उपस्थित थे।
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