सतगुरु ही मनुष्य को भवसागर पार लगा सकते हैं महंत जीत
सतगुरु ही मनुष्य को भवसागर पार लगा सकते हैं महंत जीत
सतगुरु ही मनुष्य को भवसागर पार लगा सकते हैं महंत जीत सिंह महाराजहरिद्वार वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानंद खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री नेहकलक आश्रम में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महंत उत्तम सिंह जी महाराज माता संतोष जी महाराज संत प्यार सिंह महाराज महंत श्याम सिंह महाराज महंत शर्म सिंह महाराज सहित सभी गुरुजनों की पावन स्मृति में एक विशाल संत समागमतथा भंडारे का आयोजन परम पूज्य महंत जीत सिंह जी महाराज स्वामी हरनाम सिंह जी महाराज के पतित पावन सानिध्य में संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए महंत जीत सिंह जी महाराज ने कहागुरु की महिमा का वर्णन करना समुद्र की गहराई नापने के समान है, क्योंकि गुरु का स्थान मानव जीवन में अत्यंत ऊँचा और पवित्र माना गया है। गुरु वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। जब मनुष्य जीवन की राह में भ्रमित हो जाता है, तब गुरु ही उसे सही दिशा दिखाते हैं। वे केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे जीवन के सच्चे मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और चरित्र निर्माता होते हैं। माता-पिता हमें इस संसार में लाते हैं, परंतु गुरु हमें संसार में सम्मानपूर्वक जीने की कला सिखाते हैं। गुरु शिष्य के जीवन को एक सुंदर आकार देते हैं, जैसे एक मूर्तिकार पत्थर को तराशकर अद्भुत प्रतिमा बना देता है। स्वामी श्री हरनाम दास महाराज ने कहा प्राचीन काल से ही हमारे देश में गुरु-शिष्य परंपरा का विशेष महत्व रहा है। आश्रमों में रहकर शिष्य अपने गुरु से केवल वेद-शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं प्राप्त करते थे, बल्कि संयम, अनुशासन, परिश्रम और सेवा की भावना भी सीखते थे। गुरु अपने शिष्य को आत्मनिर्भर, साहसी और सत्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा देते थे। इतिहास में अनेक उदाहरण मिलते हैं महंत बलवंत सिंह महाराज ने कहा जहाँ योग्य गुरु के मार्गदर्शन में साधारण शिष्य भी असाधारण बन गए। गुरु शिष्य के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारते हैं और उसे जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। महंत मोहन सिंह महाराज ने कहा
गुरु का आशीर्वाद शिष्य के लिए अमूल्य धन के समान होता है। जब जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, तब गुरु की दी हुई सीख ही सहारा बनती है। वे हमें केवल सफलता का मार्ग नहीं दिखाते, बल्कि असफलता को स्वीकार कर उससे सीखने की प्रेरणा भी देते हैं। महंत विष्णु दास जी महाराज ने कहा गुरु हमें सिखाते हैं कि सच्ची सफलता केवल धन या पद प्राप्त करने में नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र और उच्च विचारों में निहित होती है। वे हमें सिखाते हैं कि सत्य, ईमानदारी और परिश्रम से ही जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त की जा सकती है सच्चा गुरु वही है जो अपने शिष्य को केवल जानकारी न देकर उसे समझ और विवेक प्रदान करे। वह शिष्य को प्रश्न पूछने, सोचने और स्वयं निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है। महंत सूरज दास महाराज ने कहा गुरु का हृदय अपने शिष्य के लिए स्नेह और करुणा से भरा होता है। वह अपने शिष्य की उन्नति देखकर प्रसन्न होता है और उसकी गलतियों को सुधारकर उसे सही मार्ग पर चलाता है। महंतश्री नारायण दास पटवारी महाराज ने कहा गुरु का सम्मान करना और उनके उपदेशों का पालन करना प्रत्येक विद्यार्थी का प्रथम कर्तव्य है। आज के आधुनिक युग में भले ही शिक्षा के साधन बदल गए हों, परंतु गुरु का महत्व आज भी उतना ही है जितना प्राचीन काल में था। चाहे विद्यालय हो, महाविद्यालय हो या जीवन का कोई भी क्षेत्र, गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है। गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है और ज्ञान के बिना जीवन दिशाहीन। इसलिए हमें सदैव अपने गुरुजनों का आदर करना चाहिए, उनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल, सार्थक और उज्ज्वल बनाना चाहिए। स्वामी कृष्ण देव महाराज ने कहा गुरु की महिमा अनंत है और उनके उपकारों का ऋण हम कभी नहीं चुका सकते, परंतु उनके आदर्शों का पालन करके हम उनके प्रति सच्ची श्रद्धा प्रकट कर सकते हैं। यह अवसर पर महंत सूरज दास महाराज महंत बिहारी शरण महाराज महंत हरिदास महाराजस्वामी अंकित शरण महाराज स्वामी राघवेंद्र दास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे सभी ने आयोजित विशाल भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया तथा संत महापुरुषों के श्री मुख से बही ज्ञान की गंगा में गोते लगाये
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